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पापा मुस्लिम. खुद का नाम मुमताज़ बेग़म जहां देहलवी. 14 फरवरी, 1933 को दिल्ली में जन्म. देविका रानी ने नाम बदलकर रख दिया- मधुबाला.
केदार शर्मा की फिल्म नीलकमल में राजकपूर के साथ आई और बड़े परदे पर छा गई. गुमनामी में जी रही अदाकारा को रातो-रात 'वीनस ऑफ़ द स्क्रीन' कहा जाना चला. और फिर फिल्म 'महल' के बाद उसकी सफलतम फिल्मों ने जो किया वो इतिहास है.
उसके चेहरे की मुस्कराहट. उसकी अदाएं. उसके तेवर. मानो सुबह के उगते सूरज और रात के डूबते चांद ने साजिशन अपनी सुंदरता उसे सौंप दी हो.
जब एक्टिंग करने लगी तो डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और एक्टर सब उस पर जान छिड़कते थे. दिलीप कुमार, शम्मी कपूर, किशोर कुमार, भारत भूषण, प्रदीप कुमार और कमाल अमरोही...
अकबर की लोंडी कहते हुए मुग़ले आज़म के सेट पर दिलीप कुमार ने मधुबाला को थप्पड़ भी मार दिया.
के. आसिफ ने मामला संभाला और कहा कि देखो मधु दिलीप अब भी तुमसे प्यार करते हैं. मधु नहीं मानी. किशोर से शादी कर ली. प्यार किया था दिलीप से.
राजकपूर ने मधुबाला को लेकर कहा जैसे भगवान ने खुद अपने हाथों से उन्हें संगमरमर से तराशा हो. एक पत्रिका ने मधुबाला से खुद के बारे में लिखने को कहा तो उन्होंने लिखा, 'मैं खुद को खो चुकी हूं. ऐसे में खुद के बारे में क्या लिखूं. मुझे लग रहा है आपने मुझे उसके बारे में लिखने को कहा है जिसे मैं जानती नहीं.'\
दुनिया में जब मर्लिन मुनरो का जादू छाया था. अमेरिका का हर शख्स मुनरो के हुस्न का दीवाना था. मुनरो के समानांतर कोई था ही नहीं. उस वक्त अमेरिका की मशहूर मैगजीन थियेटर आर्ट्स ने मधुवाला पर एक बड़ा-सा लेख लिखा. जिसका शीर्षक था- 'द बिगेस्ट स्टार इन द वर्ल्ड एंड सी इज़ नॉट इन बेवरली हिल्स'
मधुवाला का दर्द उनकी खूबसूरती और उनके स्टारडम जितना ही बड़ा था. फिल्म के सैट पर ही बेहोश हो गई. दिल में छेद था. खून थूकती दुनिया की ये सबसे बड़ी सुपरस्टार 9 साल तक बिस्तर पर पड़ी रही. बेबस और लाचार. जिंदगी जीने की इच्छा रखने वाली मधुवाला पीड़ा और तड़प में टूटती जा रही थी.
मुगले आज़म तक वो टूट चुकी थी. दर्द असहनीय हो चुका था. लेकिन अनारकली कोई और नहीं हो सकती थी. के. आसिफ बेरहम निर्देशक थे. असली जंजीरों से बांध देते थे- अनारकली को. उसने पूरी फिल्म की.
23 फरवरी 1969 की रात वो चली गई. मधुवाला हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन पैदाइश है. जिसका जादू कभी खत्म नहीं होगा.
36 साल की उम्र में वो चल बसी. इसमें से भी अंतिम 9 साल बिस्तर पर थीं. इसके बावजूद भी बेहतरीन अभिनेत्रियों के जब भी बात आएगी मधुवाला का नाम उसमें सबसे ऊपर रहेगा.
मुगले आज़म का वो दृश्य
फूलों से हर ज़र्रा सजा है. जिसमें पलाश के फूलों की बहुतायत है. सलीम और अनारकली के सिवाय उस स्पेस में कोई नहीं है. आह, मानो प्रकृति आसमान से नूर बरसा रही हो.मोर का पंख लेकर सलीम अनारकली के चेहरे से लगाता है और अनारकली के चेहरे से प्रेमीय अहसासों का समंदर उमड़ पड़ता है.
फूलों से तुलने वाली लड़की फूलों के ऊपर लापरवाही से पड़ी है. चेहरे को दुपट्टा से ढक लेती है. मानो चांद शरमाकर छिप ना जाए. लड़की पीले कपड़ों में चबूतरे पर है. पीछे पानी में आग लगा देने वाला मद्धम संगीत माहौल को जानलेवा बना रहा है.
भारतीय सिनेमा जगत के सबसे रोमांटिक दृश्यों की जब भी बात होगी- इस सीन को उस सूची में पहले नंबर पर रखना ही पड़ेगा.
By - चमन मिश्रा
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