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| टाइम. कॉम |
जिन रघुराम राजन को मोदी सरकार ने बतौर RBI गवर्नर दूसरे कार्यकाल के लायक नहीं समझा, वे आज बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर बनने की होड़ में हैं।
ऐसा तब है, जब उन्होंने इस पद के लिए कोई इच्छा नहीं जताई है; जबकि RBI के गर्वनर पद छोड़ने से पहले उन्होंने कहा था कि वे गर्वनर बने रहने को तैयार थे। बावजूद इसके 'गहन चिंतन' और 'सरकार से चर्चा के बाद' उन्होंने वापस जाने का फैसला किया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया था कि जब भी देश को उनकी सेवा की जरूरत रहेगी, वे तैयार रहेंगे।
2014 में मोदी गर्वनमेंट के मंत्रिमंडल की सूची पर किसी ने टिप्पणी की थी कि 'उन्हें काबिल लोगों की बजाए
वफादारों की जरूरत है।' राजन के साथ भी यही हुआ।
बतौर RBI गवर्नर उन्हें महीने के 90 हजार रुपये मिलते थे, जिस पद को उन्होंने भारी मन से छोड़ा था। बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर को महीने के करीब 8 करोड़ साढ़े 13 लाख रुपये मिलते हैं, जिस नौकरी को पाने के लिए उन्होंने कोई संकेत नहीं दिए हैं। यह इंग्लैंड के प्रधानमंत्री की सैलरी से सात गुना ज्यादा है, जबकि भारत के प्रधानमंत्री का वेतन 1.60 लाख है।
एक बात और, पिछले साल अर्थशास्त्र के नोबेल के लिए भी राजन को नामित किया जा चुका है।
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