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By - राजीव मित्तल
जाड़ों की कुनकुनी दोपहर..चारबाग में एपीसेन रोड की तरफ मुड़ते रास्ते के किनारे मोहन होटल के नीचे तब डोसा और कटलेट्स का शानदार इंतजाम हुआ करता था..रोज सुबह वहां वामाचार के डायलॉग रटे जाते..
एमए करने के बाद लखनऊ लौटने पर दो बेहद हरामुद्दहल से पुनर्मिलन..
पहले उस नामाकूल शख्स के बारे में..
मिथिलेश चतुर्वेदी उर्फ़ चूं चूं ..कई साल से मुंबई में..कई फिल्मों में रोल निभाए...अजब प्रेम की ग़ज़ब कहानी..में कैटरीना कैफ़ का बाप वोइच बना था..शीतल मुखर्जी का बचपन का दोस्त..अपुन को दोनों .. इंटर (फेल) में मिले और खासी यारी हो गयी...शीतल मुखर्जी स्साला हमेशा शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की मुद्रा में..
चूँ चूँ को उसके चतुर्वेदिया बाप ने इंटर पास करते ही किसी सरकारी चौबे से कह कर किसी सरकारी विभाग में सरकारी ऑडिटर बनवा दिया था..इधर माँ-पिता के अलगाव ने हमें एक फायदा ये पहुँचाया कि माँ समझती कि मैं अपने बाप के पास हूँ और पिता समझते कि बेटा माँ के पास..पर हम पाए जाते कहीं और..एमए कर ने के बाद का लखेरापन ज़ोरों पर..शीतल के साथ जम कर दारू और चरस का सेवन...
चाय सुड़कते चौबे ने ब्रज की मोटी मोटी गालियां दीं और पूछा..देवा मेले चलोगे तुम दोनों!! देसी पिलवाऊंगा..तभी एक खटारा बस वहां रुकी..चौबे दौड़ा और बस में बैठ हम दोनों को आवाज़ मारी गालियों के साथ..अबे ..$%^&*#@...मैं और शीतल भी चढ़ लिए बस में...
दोपहर तीन बजे पहुँच गए..उसने अपने विभाग वालों की खोजबीन कर दो बोतलें माल्टा की मंगवाईं...पांच बजते बजते अँधेरा और हमारा सुरूर शुरू...प्रोग्राम बना कि तंबू कनात में दिखाई जा रही फिल्म देखी जाए...कुछ देर बाद शीतल को पनास लगी, निकल लिया...आधा घंटे बाद आया.. बोला..बाहर चलो..
बाहर आये तो बोला वो देखो.. एक लड़की चमकदार साड़ी पहने सिर झुकाए मुस्कुरा रही...
होश गुम.. हकलाते हुए .. पटी हुई लड़की से पूछताछ का आनंद आप भी लें ..
आपका नाम क्या है!!
शबनम..
कहाँ रहती हैं!!
पास के गाँव में..
घर में कौन कौन है!!
अम्मी अब्बा तो भाई तीन बहन...
पढ़ती हैं या कोई काम...!
लड़की इस उजबक को अजीब नज़रों से देखने लगी..
टाइम देखा तो रात के नौ बज चुके थे..
चलो आपको गाँव तक छोड़ आते हैं..
शबनम-राजीव संवाद के दौरान शीतल और चूंचूं दोनों हुक्का बने रहे..
खैर जी.. लड़की को गाँव की सरहद तक पहुंचा दिया..शीतल मुखर्जी ने उसको कुछ नोट हम दोनों से ले कर पकड़ाये..
शबनम के ओझल होते ही अपनी बस जूतों से पिटाई नहीं हुई..
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