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"औरतों की जगह या तो रसोई में होवे है या तो पति के साथ बिस्तर पे, स्कूल कॉलेज में नहीं "ऐसी मानसिकता और सोच रखने वाले चमचमाती सफेद धोती कुर्ता में पाँचों पंचों के सामने सर झुकाये परवतिया खड़ी थी।उसके साथ गाँव का ही एक नंबर का लोफर बदमाश गुंडा कलुआ ने कल शाम जब स्कूल से पढ़कर लौट रही थी तब रेप किया था।परवतिया चुप बैठने और दबने वाली लड़की न थी।
विदेश के लाखों के पैकेज छोड़कर गाँव मे सुकन्या ने लड़कियों की भलाई के लिए एक साल से स्कूल में पढ़ा रही थी आसपास के करीब सौ लड़कियो को वो पढाती ,उन्हें हक़ से जीने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित करती।आज वो भी स्कूल के पास लगने वाले पंचायत में परवतिया के साथ पंचों के निर्णय का इंतज़ार कर रही थी।
काफी सोच विचार के बाद बड़ी बड़ी मुछों पर ताव देते हुए पंचों ने गाँव वालों के सामने फैसला सुनाया की "गाँव की इज़्ज़त को ध्यान में रखते हुए कलुआ की शादी परवतिया से कराने का पंचों द्वारा अंतिम फैसला लिया गया है।"
कल रात से रोते रोते परवतिया के आँसू सूख चुके थे।उसके गरीब किसान माँ बाप हाथ जोड़े सर झुकाये बेटी के किस्मत को कोस रहे थे।परवतिया तो फैसला सुनकर जहाँ चक्कर खाकर गिर पड़ी वहीँ कल्लू गुंडे के मुँह पर कुटिल मुस्कान तैर गयी वह तो कब से परवतिया पे बुरी नज़र गड़ाए बैठा था।
तभी सुकन्या मन ही मन कुछ कठोर फैसले लेते हुए चुपचाप वहाँ से स्कूल की ओर चल पड़ी जहाँ अभी भी सैकड़ों लड़कियाँ पंचों के फैसले का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी।
अचानक से नौंवी और दसवीं क्लास की सारी लड़कियाँ एक साथ स्कूल से मन मे आक्रोश और लाल लाल आँखों मे ज्वाला लिए उन जगह की ओर दौड़ पड़ी जहाँ पंचों ने फैसला सुनाया था।परवतिया के साथ हुई घटना पे पंचो के फैसले से उनके अंदर का दबा तूफान भड़क उठा।
जब तक कोई कुछ समझ पाता उन लड़कियों ने कल्लू बदमाश के सारे कपड़े फाड़कर सबके सामने नंगा कर दिया था बिल्कुल नंगा।फिर हा हा कर सब हँसने लगी।वो नंगा गुंडा शर्म से इधर उधर छुपने की कोशिश करता तो सब लड़कियॉ मिलकर फिर उसे बीच में खड़ा कर ताली बजाने लगती।
नौंवी और दशमी क्लास की लड़कियों पे आज इज़्ज़त का बदला इज़्ज़त से लेने का जुनून सवार था।
थोड़ी देर शर्म के मारे उधर भागने के बाद बदहवासी में कलुआ कुँए में गिर पडा और उसकी डूबने से मौत हो गई।
थोड़ी देर पहले जिस परवतिया की आँखों में दुःख के आँसू थे वही आँसू अब खुशी के आँसू में बदल गए।पंच लोग भी लड़कियों का रौद्र रूप देखकर भाग खड़े हुए और सुकन्या को लगा कि लड़कियों को आत्मसम्मान का पहला पाठ पढ़ाना सफल रहा।
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| लेखक - संजीव कुमार |


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