- Get link
- X
- Other Apps
- Get link
- X
- Other Apps
वी शांताराम एक ऐसे फिल्मकार हैं जिन्होंने मुख्यतः सामाजिक सरोकार रखने वाली फिल्मों का निर्माण किया। उनकी फिल्में गांधी युग के आदर्शों से प्रभावित रही है।
'दो आंखें बारह हाथ' उनकी एक उत्कृष्ट फिल्म है। इस फिल्म में एक युवा जेलर आदिनाथ (जिस का किरदार स्वयं शांताराम जी ने निभाया है) छः खूंखार कैदियों को जेल से रिहा होने के बाद उन्हें एक नई और बेहतर जिंदगी जीने के लिए मदद करता है। वह उनकी उग्रता, क्रोध और पशुता का मुकाबला प्रेम और सहानुभूति से करता है। उनके अंदर की नैतिकता और मानवीयता को विकसित करने का प्रयास करता है। इस कोशिश में उसे उनकी हिंसा का भी शिकार होना पड़ता है। पर आदिनाथ का यह बर्ताव उन कैदियों के हृदय परिवर्तन का कारण बनता है।
वी. शांताराम जी की अन्य फिल्में भी मानव की न्याय बुद्धि, विवेक और प्रेम जैसे सद्गुणों को महत्व देनेवाली होती है। शांताराम जी कि फिल्में ही यह संदेश देती है
आज के समय में जब 2464 लोगों पर कि गयी एक रिसर्च कि रिपोर्ट बताती है कि 53 प्रतिशत लोगों को सैनिक शासन और युद्ध के प्रति लगाव हो रहा है। ऐसे समय में उनकी फिल्मों की प्रासंगिकता पहले से कहीं ज्यादा है।
By - अंकेश मद्देशिया
'दो आंखें बारह हाथ' उनकी एक उत्कृष्ट फिल्म है। इस फिल्म में एक युवा जेलर आदिनाथ (जिस का किरदार स्वयं शांताराम जी ने निभाया है) छः खूंखार कैदियों को जेल से रिहा होने के बाद उन्हें एक नई और बेहतर जिंदगी जीने के लिए मदद करता है। वह उनकी उग्रता, क्रोध और पशुता का मुकाबला प्रेम और सहानुभूति से करता है। उनके अंदर की नैतिकता और मानवीयता को विकसित करने का प्रयास करता है। इस कोशिश में उसे उनकी हिंसा का भी शिकार होना पड़ता है। पर आदिनाथ का यह बर्ताव उन कैदियों के हृदय परिवर्तन का कारण बनता है।
वी. शांताराम जी की अन्य फिल्में भी मानव की न्याय बुद्धि, विवेक और प्रेम जैसे सद्गुणों को महत्व देनेवाली होती है। शांताराम जी कि फिल्में ही यह संदेश देती है
- बड़ा कमजोर है
- आदमी भी लाखों है इसमें कमीं
- जब जुल्मों का सामना तब तू ही हमें था ना
- वह बुराई करें हम भलाई करें नहीं बदलेगी हो कामना
आज के समय में जब 2464 लोगों पर कि गयी एक रिसर्च कि रिपोर्ट बताती है कि 53 प्रतिशत लोगों को सैनिक शासन और युद्ध के प्रति लगाव हो रहा है। ऐसे समय में उनकी फिल्मों की प्रासंगिकता पहले से कहीं ज्यादा है।
By - अंकेश मद्देशिया
- फ़ोटो क्रेडिट : हिंदुस्तान टाइम्स

Comments
Post a Comment