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'मालिक हम आपकी छत्र-छाया में हैं और बहुत आस लगाकर आए हैं' कहता हुआ मंगलू ठाकुर के पैर गिर पड़ा और जमीन के कागजात ठाकुर के चरणों में रख दिए। चंदुवा को कलक्टर बनाओगे का ई जमीन वमीन गिरवी रख के- ठाकुर ने ठहाका लगाया, जमीन पर बैठे सभी हस पड़े।
रौबदार मुंछों वाला, जाति और समाज में प्रभाव तथा दबदबा रखने वाला स्वरूप से सज्जित ठाकुर- बचपन से यही तो देखता आया था अपने माता-पिता का चहेता और पढ़ने में होनहार चंदन। चंदन ने फिल्मों में भी तो यही देखा था।
"गांव जाकर शहर की तरक्की और बदलते नये विचारों के बारे में बताऊंगा" चंदन शहर में दोस्तों को बहुत उत्साह से कह रहा था।
'पिताजी आज हमारी जमीन हमें मिल जाएगी'- रास्ते भर चंदन बात करता रहा जब वर्षों बाद ठाकुर की हवेली जा रहा था अपने पिता मंगलू के साथ ब्याज सहित पैसे देकर ज़मीन के कागजात लाने।
"ठाकुर साहब देखिए चंदन मेरा बेटा भी पढ़-लिखकर सरकारी नौकरी ले बड़ा आदमी बन गया है" मंगलू ने कहा और जमीन पर बैठ गया। पर ये क्या, ठाकुर के सामने चंदन को क्या हुआ! ठाकुर की वही रौबदार मुंछें और चंदन जडवत। जमीन से उठते हुए मंगलू जमीन के कागजात लेकर चल पड़ा। "अरे चंदुवा, देख तोहार बाप जा रहा है और तू इहां खड़ा है" - ठाकुर की रौबदार आवाज से चंदन के जडवत शरीर में चेतना हुई। अब चंदन बुदबुदाता हुआ दुहरा रहा था अबकी बार कुर्सी पर बैठ कर बात करूंगा और आंखों में थी नक्काशी की हुई बड़ी सी कुर्सी पर बैठे रौबदार मुंछों वाला ठाकुर का अक्स।
By-संजय कुमार'संज'

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